हम सभी ने इस दुनिया
को बहुत करीब से देखी
कई संबंध बने सफ़र में
कुछ करीबी कुछ अटपटी
फिर मिले रिज़वी भाई
अचानक सालों के बाद
ऊंची कद,भारी आवाज़
चेहरा मुस्कान से आबाद
हर हाल में वो हाज़िर
जहां है वक्त की पुकार
जरूरत मंद के मदद में
यह शख्स हमेशा तैयार
अकेलापन से अकेले लड़े
दूसरे को भी सहारा दिया
वक्त से न की शिकायत
हमारे साथ ये क्यों हुआ
बहती हवा सा है वो
उड़ती पतंग सा है वो
कोई फिल्मी किरतर नहीं
अपने रिज़वी भाई हैं वो ।